शनि प्रदोष व्रत 2026: भगवान शिव और शनि देव की कृपा का महासंगम
हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में प्रदोष व्रत का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। साल 2026 में शनि प्रदोष का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस वर्ष कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। यदि आप कर्ज से मुक्ति, संतान सुख या जीवन की बाधाओं को दूर करना चाहते हैं, तो शनि प्रदोष का व्रत आपके लिए वरदान साबित हो सकता है।
अक्सर पंचांग गणनाओं के कारण भक्तों में तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। इस लेख में हम आपको 2026 के सभी शनि प्रदोष व्रतों की सत्यापित सूची, पूजा का सही समय और प्रमुख शहरों के अनुसार मुहूर्त की जानकारी देंगे। शिव आराधना के इस महापर्व के साथ-साथ आप महाशिवरात्रि 2026 के विशेष मुहूर्त की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
Shani Pradosh Vrat 2026 Calendar: यहाँ देखें पूरी सूची
साल 2026 में मुख्य रूप से फरवरी और जून के महीनों में महत्वपूर्ण शनि प्रदोष पड़ रहे हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध कई स्रोतों में फरवरी की तारीखों (14 फरवरी बनाम 28 फरवरी) को लेकर मतभेद हैं।
| महीना और पक्ष | तिथि | दिन | मुहूर्त (प्रदोष काल) |
|---|---|---|---|
| माघ, कृष्ण पक्ष | 14 फरवरी 2026 | शनिवार | शाम 06:10 से रात 08:35 तक |
| ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष | 27 जून 2026 | शनिवार | शाम 06:21 से रात 08:42 तक |
ध्यान दें कि पंचांग भेद के कारण कुछ क्षेत्रों में तिथियां बदल सकती हैं। आधिकारिक तिथियों की पुष्टि के लिए आप Drik Panchang या Aaj Ka Panchang द्वारा जारी सांस्कृतिक कैलेंडरों का संदर्भ ले सकते हैं।

शहर के अनुसार सटीक प्रदोष काल मुहूर्त (City-wise Timings)
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में की जाती है। भारत के प्रमुख शहरों में सूर्यास्त का समय अलग-अलग होने के कारण पूजा का मुहूर्त भी भिन्न होता है। नीचे 14 फरवरी 2026 के लिए प्रमुख शहरों का समय दिया गया है:
- दिल्ली: शाम 06:11 से रात 08:44 तक
- मुंबई: शाम 06:38 से रात 09:02 तक
- बेंगलुरु: शाम 06:29 से रात 08:49 तक
- कोलकाता: शाम 05:32 से रात 07:56 तक
व्रत के पारण और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विजया एकादशी 2026 का विवरण भी भक्तों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
शनि प्रदोष व्रत की महिमा और लाभ
स्कंद पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति शनि प्रदोष के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा करता है, उसे ‘पुत्र प्राप्ति’ का सौभाग्य मिलता है। इसके अतिरिक्त, यह व्रत शनि के कुप्रभावों जैसे साढ़े साती और ढैय्या के असर को कम करने में भी सहायक है।
पूजा की सरल विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो काले या नीले रंग से बचें) धारण करें।
- शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी अर्पित करें।
- शनि देव के निमित्त पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें।
यदि आप पंचांग के अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों के बारे में जानना चाहते हैं, तो आमलकी एकादशी 2026 का गाइड भी जरूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
2026 में कुल कितने शनि प्रदोष व्रत हैं?
साल 2026 में पंचांग गणना के अनुसार मुख्य रूप से 3 शनि प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। इनमें फरवरी के महीने में दो और सितंबर में एक शनि प्रदोष का योग है।
क्या 14 फरवरी 2026 को शनि प्रदोष है?
हाँ, 14 फरवरी 2026 को माघ मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है, जो शनिवार को होने के कारण शनि प्रदोष कहलाएगी।
शनि प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए?
इस व्रत में फलाहार ग्रहण करना चाहिए। शाम की पूजा के बाद आप सात्विक भोजन ले सकते हैं, लेकिन अन्न का त्याग करना उत्तम माना जाता है।
क्या शनि प्रदोष से शनि दोष शांत होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव शनि देव के गुरु हैं। इसलिए शनि प्रदोष पर शिव की आराधना करने से शनि दोष और बाधाएं स्वतः ही शांत हो जाती हैं।
निष्कर्ष
शनि प्रदोष व्रत 2026 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह मानसिक शांति और ग्रह शांति का एक वैज्ञानिक मार्ग भी है। ऊपर दिए गए मुहूर्तों और तिथियों का पालन कर आप महादेव और शनि देव की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं। अधिक सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पुरोहित से परामर्श अवश्य लें।










