कुंभ संक्रांति 2026: एक आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत
हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व होता है। जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस संक्रमण काल को संक्रांति कहा जाता है।
कुंभ संक्रांति 2026 वह समय है जब सूर्य देव मकर राशि की अपनी यात्रा समाप्त कर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। इस वर्ष यह पर्व 13 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा।
धार्मिक दृष्टिकोण से, यह समय दान, पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। माघ महीने के दौरान आने वाली यह संक्रांति मोक्ष और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि आप भी इस दिन के पूर्ण लाभ उठाना चाहते हैं, तो यह मार्गदर्शिका आपके लिए है। इसी महीने में
Magh Purnima 2026 का भी विशेष महत्व है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा को और बढ़ा देता है।
कुंभ संक्रांति 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
कुंभ संक्रांति के दिन ‘पुण्य काल’ का विशेष महत्व होता है। मान्यताओं के अनुसार, इस काल के दौरान किए गए धार्मिक कार्य कई गुना अधिक फल प्रदान करते हैं।
| आयोजन |
दिनांक और समय |
| कुंभ संक्रांति तिथि |
शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 |
| कुंभ संक्रांति पुण्य काल |
दोपहर 01:21 बजे से शाम 06:12 बजे तक |
| महा पुण्य काल |
दोपहर 01:21 बजे से दोपहर 03:45 बजे तक |
| संक्रांति क्षण |
दोपहर 01:21 बजे |
ध्यान रखें कि संक्रांति के समय का निर्धारण सूर्य की गति पर आधारित होता है। सटीक गणना के लिए आप
Drik Panchang जैसी आधिकारिक ज्योतिषीय वेबसाइटों का संदर्भ ले सकते हैं।
कुंभ संक्रांति का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
कुंभ संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह मानवीय चेतना के उत्थान का समय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं। जब सूर्य (पिता) अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करते हैं, तो यह समय धैर्य और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है।
- स्नान का महत्व: गंगा, यमुना या गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से पिछले पापों का नाश होता है।
- दान का फल: इस दिन अनाज, वस्त्र और तिल का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
- सूर्य देव की कृपा: सूर्य को अर्घ्य देने से मान-सम्मान और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
इस शुभ अवधि के दौरान, भक्त अक्सर अन्य महत्वपूर्ण व्रतों की भी तैयारी करते हैं, जैसे कि
विजया एकादशी 2026, जो सफलता प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध है।
कुंभ संक्रांति पूजा विधि (Step-by-Step)
यदि आप घर पर कुंभ संक्रांति की पूजा करना चाहते हैं, तो इस सरल विधि का पालन करें:
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें
संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व उठना सर्वोत्तम माना जाता है। यदि संभव हो, तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
2. सूर्य देव को अर्घ्य दें
तांबे के लोटे में जल लें, उसमें लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालें। ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें।
3. भगवान विष्णु की पूजा
स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। भगवान गणेश का आशीर्वाद लेना भी न भूलें, विशेषकर यदि आपने हाल ही में
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 का व्रत किया है।
4. दान का संकल्प
पूजा के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान दें। कुंभ संक्रांति पर गाय को चारा खिलाना भी शुभ माना जाता है।
कुंभ संक्रांति पर क्या दान करें?
शास्त्रों के अनुसार, कुंभ संक्रांति पर किया गया दान सीधे वैकुंठ धाम की प्राप्ति में सहायक होता है। इस दिन निम्नलिखित वस्तुओं का दान करना चाहिए:
- तिल और गुड़: शनि और सूर्य दोनों को प्रसन्न करने के लिए।
- ऊनी वस्त्र: चूंकि यह समय ठंड का होता है, इसलिए गरीबों को कंबल दान करना महादान कहलाता है।
- अनाज: गेहूं, चावल या दाल का दान परिवार में सुख-शांति लाता है।
- लोहा: शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए लोहे की वस्तुओं का दान किया जा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए आप
NDTV Khabar के धर्म अनुभाग को भी पढ़ सकते हैं।
सावधानियां: संक्रांति के दिन क्या न करें
पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) और मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें।
- किसी भी व्यक्ति का अपमान न करें और न ही अपशब्द बोलें।
- घर में कलह या वाद-विवाद से बचें।
- बिना स्नान किए भोजन ग्रहण न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: कुंभ संक्रांति 2026 में कब है?
उत्तर: कुंभ संक्रांति 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
प्रश्न 2: पुण्य काल का समय क्या है?
उत्तर: 2026 में कुंभ संक्रांति का पुण्य काल दोपहर 01:21 बजे से शाम 06:12 बजे तक रहेगा।
प्रश्न 3: क्या इस दिन गंगा स्नान अनिवार्य है?
उत्तर: हालांकि गंगा स्नान का विशेष महत्व है, लेकिन यदि आप असमर्थ हैं, तो घर पर ही पवित्र मन से स्नान करके सूर्य की आराधना कर सकते हैं।
प्रश्न 4: कुंभ संक्रांति और महाकुंभ में क्या अंतर है?
उत्तर: कुंभ संक्रांति एक वार्षिक सौर घटना है, जबकि महाकुंभ एक विशाल धार्मिक मेला है जो विशेष ग्रहों की स्थिति में 12 वर्षों में एक बार आयोजित होता है। आप कुंभ मेले के बारे में अधिक जानकारी
PIB India पर प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्न 5: इस दिन किन मंत्रों का जाप करना चाहिए?
उत्तर: मुख्य रूप से ‘ॐ सूर्याय नमः’ और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करना चाहिए।
निष्कर्ष
कुंभ संक्रांति 2026 हमें अपने आंतरिक आध्यात्मिक पक्ष से जुड़ने का एक और अवसर प्रदान करती है। सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, बशर्ते हम श्रद्धा और भक्ति के साथ नियमों का पालन करें। इस दिन किए गए छोटे-छोटे प्रयास, जैसे दान और प्रार्थना, आपके भविष्य को उज्जवल बना सकते हैं।