Home » Events & Days » द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: 5 फरवरी को भगवान गणेश के इस विशेष ‘पीठ’ और रूप की पूजा से चमक उठेगी किस्मत
5 फरवरी 2026 को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश के विशिष्ट चार मुख वाले स्वरूप 'द्विजप्रिय' की पूजा की जाती है। जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा का विशेष विधान।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: आध्यात्मिक शक्ति का महापर्व
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है और संकष्टी चतुर्थी का दिन उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर होता है। वर्ष 2026 में 5 फरवरी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से भगवान गणेश के ‘द्विजप्रिय’ स्वरूप को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और उसे ज्ञान एवं धन की प्राप्ति होती है।
द्विजप्रिय गणपति भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से छठे स्वरूप हैं। ‘द्विज’ का अर्थ होता है ‘दो बार जन्मा हुआ’ (जैसे ब्राह्मण या पक्षी) और ‘प्रिय’ का अर्थ है जिसे वे प्रिय हों। इस स्वरूप की उपासना विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो शिक्षा, अध्यात्म और मानसिक शांति की खोज में हैं।
द्विजप्रिय गणपति का विशिष्ट स्वरूप और ‘पीठ’ का महत्व
भगवान द्विजप्रिय गणपति का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और शक्तिशाली है। शास्त्रों के अनुसार, उनके चार मुख और चार भुजाएं हैं। उनका वर्ण चंद्रमा के समान शुभ्र (सफेद) है। वे एक विशिष्ट ‘पीठ’ (सिंहासन) पर विराजमान रहते हैं, जो उनकी स्थिरता और ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रतीक है।
स्वरूप की मुख्य विशेषताएं:
चार मुख: यह चारों वेदों और चारों दिशाओं के ज्ञान का प्रतीक हैं।
आयुध: उनके हाथों में कमंडल, रुद्राक्ष की माला, एक दंड (छड़ी) और शास्त्र (पांडुलिपि) सुशोभित हैं।
आभूषण: वे दिव्य आभूषणों और यज्ञोपवीत (जनेऊ) से सुसज्जित हैं।
5 फरवरी को पूजा के दौरान इस विशिष्ट ‘पीठ’ का ध्यान करना अनिवार्य है। माना जाता है कि जो भक्त इस दिन गणेश जी के इस शांत और ज्ञानमयी स्वरूप की आराधना करते हैं, उनके जीवन में स्थिरता आती है। आध्यात्मिक प्रगति के साथ-साथ भौतिक सुखों के लिए भी यह पूजा विशेष मानी गई है।
भगवान द्विजप्रिय गणपति: ज्ञान और समृद्धि के प्रतीक
5 फरवरी 2026: शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय
संकष्टी चतुर्थी में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता। 2026 में इस दिन के मुख्य समय नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:
आयोजन
तिथि और समय
चतुर्थी तिथि प्रारंभ
5 फरवरी 2026, प्रातः काल
चतुर्थी तिथि समाप्त
6 फरवरी 2026, सूर्योदय से पूर्व
चंद्रोदय का समय (अपेक्षित)
रात्रि 09:15 बजे (स्थान के अनुसार भिन्न)
शुभ पूजा मुहूर्त
शाम 05:45 से 07:20 तक
पूजा की सटीक जानकारी के लिए आप NDTV या Times of India जैसे प्रतिष्ठित समाचार पोर्टलों पर धार्मिक अपडेट देख सकते हैं।
द्विजप्रिय गणपति पूजा विधि (Step-by-Step Guide)
5 फरवरी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद नीचे दी गई विधि का पालन करें:
वेदी की स्थापना: उत्तर या पूर्व दिशा में एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और द्विजप्रिय गणपति की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
कलश स्थापना: चौकी के पास एक जल से भरा कलश रखें।
स्नान और श्रृंगार: गणेश जी को गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें पीले वस्त्र, जनेऊ और चंदन अर्पित करें।
विशेष भोग: द्विजप्रिय गणपति को मोदक और विशेष रूप से गुड़ से बनी मिठाइयां पसंद हैं। उन्हें दूर्वा की 21 गांठें अवश्य चढ़ाएं।
मंत्र जप: पूजा के दौरान ‘ॐ द्विजप्रियाय नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
द्विजप्रिय गणपति का क्या अर्थ है?
द्विजप्रिय का अर्थ है ‘द्विजों (ब्राह्मणों या ज्ञानियों) के प्रिय’। भगवान गणेश का यह स्वरूप ज्ञान, विद्या और वेदों के संरक्षण का प्रतीक है।
5 फरवरी 2026 को चंद्रोदय का समय क्या है?
5 फरवरी 2026 को चंद्रोदय का अनुमानित समय रात्रि 09:15 बजे है। हालांकि, अलग-अलग शहरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, वाराणसी) में इसमें कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
क्या इस व्रत में नमक खा सकते हैं?
संकष्टी चतुर्थी व्रत में सामान्य नमक का प्रयोग वर्जित है। आप फलाहार के रूप में सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सूर्यास्त और चंद्र दर्शन के बाद ही पारण करना श्रेष्ठ होता है।
द्विजप्रिय गणपति की पूजा के लिए कौन सा मंत्र सबसे प्रभावी है?
सबसे सरल और प्रभावी मंत्र है: ‘ॐ गं गणपतये नमः’। इसके अलावा, विशिष्ट फल के लिए ‘ॐ द्विजप्रियाय नमः’ का जप करना चाहिए।
पूजा में दूर्वा का क्या महत्व है?
भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। यह शीतलता और शांति का प्रतीक है। द्विजप्रिय चतुर्थी पर 21 दूर्वा अर्पित करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
निष्कर्ष
5 फरवरी 2026 को आने वाली द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी आपके जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आ सकती है। भगवान गणेश के इस चार मुख वाले अद्भुत स्वरूप की पूजा करें और उनके दिव्य ‘पीठ’ का ध्यान करें। यह न केवल आपके संकटों को हरने वाला होगा, बल्कि आपको सफलता के नए मार्ग भी दिखाएगा। अधिक धार्मिक और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए India Gov की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें।
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