क्या आपने कभी सोचा है कि दिसंबर की सर्द सुबहों में, जब पूरा देश एक अलग ही उत्साह में डूबा होता है, तब क्रिसमस सिर्फ एक पश्चिमी त्योहार नहीं रह जाता? भारत, अपनी विविध संस्कृतियों और परंपराओं के साथ, क्रिसमस को ‘बड़ा दिन’ के रूप में मनाता है, जहाँ हर समुदाय के लोग इस खुशी में शामिल होते हैं। यह सिर्फ ईसाइयों का त्योहार नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए खुशियाँ बांटने और एकता का प्रतीक बन गया है।
- क्रिसमस भारत में एक राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) है, जो 25 दिसंबर को मनाया जाता है।
- गोवा, केरल और पूर्वोत्तर राज्य भारत में क्रिसमस के जश्न के प्रमुख केंद्र हैं, जहाँ विशेष परंपराएं देखने को मिलती हैं।
- यह त्योहार सिर्फ ईसाई समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि गैर-ईसाई भी इसमें खुशी-खुशी शामिल होते हैं, जिससे यह एक राष्ट्रीय उत्सव बन जाता है।
भारत त्योहारों का देश है, जहाँ हर धर्म और संस्कृति के लोग मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। क्रिसमस भी इन्हीं त्योहारों में से एक है, जैसे मार्गशीर्ष पूर्णिमा या दिवाली। देश की 2.3% आबादी ईसाई है, जो संख्या में 25 मिलियन से अधिक लोग होते हैं। ये लोग हर साल धूमधाम से क्रिसमस मनाते हैं, और इसकी रौनक बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक में दिखाई देती है।
🌟 भारत में क्रिसमस का अनूठा रंग
भारत में क्रिसमस का जश्न पश्चिमी देशों से थोड़ा अलग होता है, जहाँ भारतीय परंपराओं का समावेश इसे और भी खास बनाता है। आधी रात की सामूहिक प्रार्थना (मिडनाइट मास) एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, खासकर कैथोलिकों के लिए। चर्चों को खूबसूरती से सजाया जाता है, जहाँ poinsettia फूल और मोमबत्तियाँ जगमगाती हैं। कई परिवार पारंपरिक क्रिसमस ट्री के बजाय केले या आम के पत्तों से अपने घरों को सजाते हैं, क्योंकि आम के पेड़ को पवित्र माना जाता है। इसके अलावा, छोटे मिट्टी के तेल के दीपक भी घरों में जलाए जाते हैं, जो शिशु यीशु को ‘दुनिया की रोशनी’ के रूप में दर्शाते हैं।
🌊 गोवा: समुद्र किनारे क्रिसमस की धूम
भारत में क्रिसमस का जिक्र हो और गोवा की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। पुर्तगाली विरासत के कारण यहाँ क्रिसमस का जश्न बेहद जीवंत होता है। दिसंबर के आते ही गोवा का तटीय स्वर्ग एक उत्सव की भूमि में बदल जाता है। चर्चों में आधी रात की सामूहिक प्रार्थनाएँ होती हैं, और सड़कें क्रिसमस कैरल और शानदार सजावट से गुलजार रहती हैं। यहाँ ‘फादर क्रिसमस’ (सांता क्लॉज़) घोड़े से खींची जाने वाली गाड़ी में आते हैं। बीच पार्टियाँ, लाइव म्यूजिक और अलाव गोवा के क्रिसमस की पहचान हैं, जहाँ लोग देर रात तक जश्न मनाते हैं। घरों को तारों के आकार के लालटेन (पारोल्स) और विस्तृत चरनी दृश्यों (Nativity Scenes) से सजाया जाता है। पारंपरिक गोअन मिठाइयाँ, जैसे बेबिंका (Bebinca) और न्यूरियोस (Neureos), इस उत्सव का अहम हिस्सा होती हैं।
🌴 केरल: ‘गॉड्स ओन कंट्री’ में आस्था और स्वाद
केरल, जिसे ‘गॉड्स ओन कंट्री’ भी कहा जाता है, में क्रिसमस एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जहाँ राज्य की 22% आबादी ईसाई है। यहाँ सीरियन ईसाई समुदाय के लोग 1 दिसंबर से 24 दिसंबर तक 25 दिनों का उपवास रखते हैं, जो क्रिसमस की पूर्व संध्या पर आधी रात की प्रार्थना के साथ समाप्त होता है। आधी रात की सामूहिक प्रार्थना के बाद परिवार और दोस्तों के साथ एक भव्य दावत का आयोजन किया जाता है। केरल में क्रिसमस का सबसे खास व्यंजन डक रोस्ट (Duck Roast) है, जिसे नारियल के दूध और मसालों के साथ बनाया जाता है। इसके साथ अप्पम (Appam) और स्टू भी लोकप्रिय है। घरों को क्रिसमस सितारों से सजाया जाता है, और चर्चों में ‘ब्लेसिंग ऑफ फायर’ जैसे अनूठे अनुष्ठान होते हैं।
⛰️ पूर्वोत्तर भारत: पहाड़ी राज्यों में पवित्र उत्सव
पूर्वोत्तर भारत के राज्य जैसे मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर में ईसाई आबादी काफी अधिक है, और यहाँ क्रिसमस को बहुत उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। शिलांग, जिसे ‘पूर्व का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है, में क्रिसमस एक पोस्टकार्ड जैसी खूबसूरत तस्वीर पेश करता है, जहाँ गिरजाघरों में मधुर कैरल और आधी रात की सामूहिक प्रार्थनाएँ होती हैं। नागालैंड में हॉर्नबिल फेस्टिवल भी क्रिसमस के साथ मिलकर उत्सव को और रंगीन बना देता है, जहाँ पारंपरिक नृत्य और संगीत की धूम रहती है। इन क्षेत्रों में स्थानीय व्यंजन, जैसे मिर्च और बांस के अंकुर के साथ पोर्क करी, क्रिसमस की दावतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
🏙️ अन्य शहर: महानगरों में आधुनिक रौनक
मुंबई, कोलकाता और दिल्ली जैसे महानगरों में भी क्रिसमस की रौनक देखते ही बनती है। शॉपिंग मॉल और बाजार रंगीन रोशनी, क्रिसमस ट्री और सांता क्लॉज़ की सजावट से सजे होते हैं। कोलकाता का पार्क स्ट्रीट क्रिसमस फेस्टिवल अपनी खूबसूरत लाइट डिस्प्ले, फूड स्टॉल और कैरल गायन के लिए प्रसिद्ध है। दिल्ली में जर्मन क्रिसमस मार्केट जैसे आयोजन भी त्योहार की भावना को बढ़ाते हैं, जहाँ विभिन्न संस्कृतियों का मिश्रण देखने को मिलता है। कई जगहों पर ‘सीक्रेट सांता’ और दान-पुण्य के कार्य भी क्रिसमस के दौरान किए जाते हैं, जो इस त्योहार के असली मायने को दर्शाते हैं।
✅ Actionable Steps: What You Should Do
- स्थानीय उत्सवों का अनुभव करें: यदि आप गोवा, केरल या पूर्वोत्तर में हैं, तो आधी रात की प्रार्थना में शामिल हों और स्थानीय कैरल गायन का आनंद लें।
- पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लें: केरल की डक रोस्ट या गोवा की बेबिंका और सोरपोटेल (Sorpotel) जैसे विशिष्ट क्रिसमस व्यंजनों को ज़रूर आज़माएं।
- खुशियाँ बाँटें: पड़ोसियों और दोस्तों के साथ मिठाइयों और उपहारों का आदान-प्रदान करें। ‘सीक्रेट सांता’ या कंबल वितरण जैसी पहल में शामिल होकर जरूरतमंदों की मदद करें।
- घर सजाएँ: अपने घर को रंगीन सितारों, झालरों और एक छोटी चरनी (Nativity Scene) से सजाकर त्योहार का हिस्सा बनें, भले ही आप ईसाई न हों।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या क्रिसमस भारत में एक सार्वजनिक अवकाश है?
हाँ, क्रिसमस भारत में एक राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) है, जो हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन सरकारी कार्यालय, बैंक और अधिकांश व्यवसाय बंद रहते हैं।
प्रश्न 2: भारत में कितने लोग क्रिसमस मनाते हैं?
भारत में लगभग 2.3% आबादी ईसाई है, जो 25 मिलियन से अधिक लोग हैं। हालांकि, पश्चिमी प्रभावों और व्यावसायीकरण के कारण, विभिन्न धर्मों के कई लोग भी क्रिसमस मनाते हैं, जिससे यह एक व्यापक उत्सव बन जाता है।
प्रश्न 3: भारत में क्रिसमस के कुछ अनूठे व्यंजन क्या हैं?
केरल में डक रोस्ट, अप्पम और स्टू बहुत लोकप्रिय हैं। गोवा में बेबिंका, न्यूरियोस, सोरपोटेल और विंदालू जैसे व्यंजन क्रिसमस की दावतों का हिस्सा होते हैं। कुछ क्षेत्रों में बिरयानी और खीर भी बनाई जाती है।
प्रश्न 4: भारत में क्रिसमस ट्री की जगह किस चीज़ का उपयोग किया जाता है?
कई भारतीय परिवार पारंपरिक क्रिसमस ट्री के बजाय अपने घरों को केले या आम के पत्तों से सजाते हैं, क्योंकि आम के पेड़ को पवित्र माना जाता है। कभी-कभी नकली देवदार के पेड़ या स्थानीय पेड़ों की शाखाओं का भी उपयोग किया जाता है।











